क्या साहित्य भी मार दिया गया है : जब हर महीने पेट्रोल उछलता था तब गीत बनते
थे, अब हर दिन उछलता है... मगर खामोशी है...
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अगर लेजेंड रघुवीर यादव एक बार इस तरह गा दें तो उनका यह महान गीत भी अपडेट हो
जाए
साल घसीटत आ गयो जून
महंगाई सबको पी गई खून
मजदूरों के नहीं आटा-लून
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5 hours ago